World Homeopathy Day 2022: कोरोना के बाद बढ़ा होम्योपैथी का महत्व, एक्सपर्ट से जानें फायदे, सेवन का तरीका

आज ‘विश्व होम्योपैथी दिवस’ है. इस दिवस को इसलिए मनाया जाता है, ताकि लोग होम्योपैथी चिकित्सा पद्धति के बारे में जानें, उसके फायदे क्या हैं, उससे अवगत हों, लोगों में इसके प्रति जागरूकता आए. ज्यादा से ज्यादा लोग एलोपैथी यानी आधुनिक चिकित्‍सा पद्धति के जरिए ही किसी भी बीमारी का इलाज कराते हैं. मुख्य रूप से तीन तरह की चिकित्सा पद्धति है, एलोपैथी, होम्योपैथी और आयुर्वेद. कोरोना काल के बाद से आयुर्वेद की तरफ लोगों का रुख काफी बढ़ा है, लेकिन काफी लोग ऐसे भी हैं, जिनका झुकाव होम्योपैथी के प्रति पहले से काफी बढ़ा है.

‘वर्ल्ड होम्योपैथी डे’ होम्योपैथी के संस्थापक जर्मन चिकित्सक डॉ. क्रिश्चियन फ्रेडरिक सैमुअल हैनिमैन (Dr.Christian Friedrich Samuel Hahnemann) की जयंती के अवसर पर मनाया जाता है. इन्हें ही होम्योपैथी के उपयोग के जरिए स्वस्थ होने का तरीका खोजने का श्रेय जाता है. प्रत्येक वर्ष इस दिवस को एक खास थीम के तहत सेलिब्रेट किया जाता है. इस वर्ष की थीम ‘होम्योपैथी: पीपल्स च्वॉएस फॉर वेलनेस’ (Homeopathy: People’s Choice for Wellness) रखी गई है. आइए जानते हैं होम्योपैथी के महत्व, फायदे के बारे में यहां…

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होम्योपैथी के प्रति लोग हो रहे हैं जागरूक
डॉ. कल्याण बनर्जीज क्लिनिक (नई दिल्ली) के होम्योपैथी डॉक्टर अभिजीत बनर्जी कहते हैं कि होम्योपैथी के बारे में लोगों की जागरूकता पहले से काफी बढ़ रही है. एलोपैथी की बात करें, तो उसकी अपनी सीमाएं हैं. यदि कोरोना महामारी की ही बात करें, तो कई मामलों में दवाएं बेअसर साबित होती नजर आईं. साथ ही एलोपैथी दवाओं के कुछ ना कुछ साइड एफेक्ट्स भी होते हैं. कोविड फेज के बाद ये बातें विस्तृत रूप से उभर कर सामने आई हैं. आमतौर पर जिन लोगों को जानकारी है, उन्हें भी इन दावाओं के दुष्प्रभावों के बारे में पता है. पहले होम्योपैथी के प्रति बतौर वैकल्पिक विज्ञान की तरह लोगों के बीच जागरूकता तो थी ही, ऐसे में एलोपैथी में फायदा नहीं होता, तो होम्योपैथी से इलाज कराते हैं. कुछ लोग ऐसे भी थे, जो होम्योपैथी पर ही निर्भर रहते थे, लेकिन कुछ लोग ऐसे भी थे, जो एलोपैथी से होम्योपैथी में लौट जाते थे. लेकिन, कोरोना के बाद तो होम्योपैथी के कस्टमर में कई गुना इजाफा देखने को मिला है. ऐसा इसलिए संभव हुआ है, क्योंकि कोविड के दौरान और इससे उबरने के बाद होम्योपैथी के पॉजिटिव असर के बारे में लोगों को पता चला है. इसमें साइड एफेक्ट्स नहीं होते हैं. इसमें सबसे महत्वपूर्ण बात जो ध्यान रखनी चाहिए, वह है कम मेडिसिन के साथ बेहतर इलाज करना.

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क्या एलोपैथी के साथ होम्योपैथी ले सकते हैं
डॉक्टर अभिजीत कहते हैं, बिल्कुल, एलोपैथी के साथ होम्योपैथिक दवाओं का सेवन किया जा सकता है. ऐलोपैथी के तीन ग्रुप ऑफ मेडिसिन स्टेरॉएड, हॉर्मोन और एंटीबायोटिक्स होम्योपैथी के साथ नहीं चलता है. इनके अलावा कोई भी एलोपैथी मेडिसिन होम्योपैथिक दवाओं के साथ ली जा सकती है. यदि किसी को हार्ट डिजीज है या हाइपरटेंशन है, तो उसकी एलोपैथिक दवाएं नहीं बंद की जा सकती हैं, लेकिन होम्योपैथिक ट्रीटमेंट लेने में कोई नुकसान भी नहीं होता है.

किन रोगों में होम्योपैथी की दवाएं ली जा सकती हैं
किसी भी बीमारी की एमरजेंसी कंडीशन को छोड़कर होम्योपैथिक हर तरह की बीमारियों के लिए उपयुक्त है. चाहे कोई क्रोनिक डिजीज हो, बच्चों से संबंधित कोई समस्या हो, स्किन रोग हो, इसमें होम्योपैथी का जवाब नहीं.

डोजेज का कितना ध्यान रखना चाहिए
डॉक्टर अभिजीत आगे कहते हैं कि होम्योपैथी की दवाएं बहुत सेंसेटिव होती हैं, ऐसे में दवाएं लेने के साथ डॉक्टर जिन चीजों से परहेज करने के लिए कहते हैं, उसे उसी अनुसार फॉलो करना चाहिए. जिस समय पर जितनी दवाइयां लेने को कहते हैं, उसी समय ली जानी चाहिए. अगर ऐसा ना किया जाए, तो फायदा नहीं होगा. इन दवाइयों के रख-रखाव का खास ध्यान देना चाहिए. इन्हें सेंट, पाउडर, धूप या हवा में खुले नहीं रख सकते हैं. खानपान का विशेष ध्यान देना चाहिए, जैसे इन दवाओं के साथ कच्चा प्याज, कॉफी, लहसुन आदि नहीं खाना चाहिए.

रोग का इलाज कितना संभव
डॉक्टर कहते हैं, यदि शुरुआती स्टेज में कोई बीमारी सामने आए और एक होम्योपैथी डॉक्टर उसका सही तरीके से इलाज करे, तो उसके ठीक होने की संभावना काफी अधिक होती है. हाइपरटेंशन, थायरॉएड, ल्युकोडर्मा, स्किन रोग, हार्ट संबंधित समस्या, बच्चों के रोग, जोड़ों की समस्या, किडनी रोग से संबंधित मरीज अगर शुरुआती स्टेज में होम्योपैथी से इलाज कराए, तो सौ प्रतिशत रोग ठीक हो सकता है, वह भी बिना एलोपैथी से इलाज कराए. बीमारी बेहद गंभीर स्टेज में पहुंच जाए, तो फिर मुश्किल हो सकता है.

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