Pm Modi Friend Abbas: पीएम मोदी के बचपन के ‘यार’, गुजरात में नौकरी और अब कहां हैं ‘अब्बास’

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, गांधीनगर
Published by: संजीव कुमार झा
Updated Sun, 19 Jun 2022 09:59 AM IST


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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को उनकी मां हीराबेन के 100वें जन्मदिन पर उनसे मुलाकात कर उनसे आशीर्वाद लिया। पीएम मोदी ने इस अवसर पर एक ब्लॉग भी लिखा जिसमें उन्होंने अपनी मां की उदारता और देखभाल करने वाले स्वभाव के बारे में लिखा। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी मां हमेशा स्नेही और देखभाल करने वाली थीं, यहां तक कि उनके दोस्तों के प्रति भी वह वही स्वभाव रखती थीं। इसी ब्लॉग में उन्होंने अपने पिता के मित्र के पुत्र अब्बास का भी उल्लेख किया, जो उनके साथ रहता था। पीएम मोदी ने कहा कि मां हीराबेन ने अब्बास को बेटे की तरह ही पाला था।  पीएम मोदी ने कहा कि अब्बास अपने पिता के साथ पास के गांव में रहता था। लेकिन उसके पिता की असमय मौत हो गई। जिसके बाद मेरे पिता अब्बास को घर ले आए। पीएम मोदी ने कहा कि अब्बास अपनी पढ़ाई पूरी करने तक पीएम मोदी के परिवार के साथ रहे। वहीं अब्बास की चर्चा करने के बाद पीएम मोदी का ब्लॉग और अधिक सुर्खियों में आ गया। इसके बाद मीडिया में पीएम मोदी के बचपन के दोस्त अब्बास की खोज होने लगी। आखिर, अब्बास कौन हैं, कहां हैं? हालांकि, कुछ ही घंटों बाद ्अब्बास की सारी जानकारी निकलकर सामने आ गई। आइए जानते हैं आखिर अब्बास कौन हैं? अभी कहां हैं और क्या कर रहे हैं?

जानें अब्बास भाई कहां हैं और क्या कर रहे हैं?
पीएम मोदी के बचपन के दोस्त अब्बास इस समय ऑस्ट्रेलिया के सिडनी शहर में अपने छोटे बेटे के पास रहते हैं। जानकारी के अनुसार अब्बास के दो बेटे हैं। छोटा बेटा ऑस्ट्रेलिया तो बड़ा बेटा गुजरात के कासीम्पा गांव में रहता है। अब्बास सरकार में क्लास 2 कर्मचारी के तौर पर काम करते थे। वे फूड एंड सप्लाई विभाग में थे।

ईद पर मां अब्बास के लिए उसकी पसंद के पकवान बनाती थीं: पीएम मोदी
पीएम मोदी ने कहा कि ईद पर मां अब्बास के लिए उसकी पसंद के पकवान बनाती थीं। त्योहारों के समय आसपास के कुछ बच्चे हमारे यहां ही आकर खाना खाते थे। उन्हें भी मेरी मां के हाथ का बनाया खाना बहुत पसंद था। हमारे घर के आसपास जब भी कोई साधु-संत आते थे तो मां उन्हें घर बुलाकर भोजन अवश्य कराती थीं। जब वो जाने लगते, तो मां अपने लिए नहीं बल्कि हम भाई-बहनों के लिए आशीर्वाद मांगती थीं। उनसे कहती थीं कि मेरी संतानों को आशीर्वाद दीजिए कि वो दूसरों के सुख में सुख देखें और दूसरों के दुख से दुखी हों। मेरे बच्चों में भक्ति और सेवाभाव पैदा हो उन्हें ऐसा आशीर्वाद दीजिए।

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को उनकी मां हीराबेन के 100वें जन्मदिन पर उनसे मुलाकात कर उनसे आशीर्वाद लिया। पीएम मोदी ने इस अवसर पर एक ब्लॉग भी लिखा जिसमें उन्होंने अपनी मां की उदारता और देखभाल करने वाले स्वभाव के बारे में लिखा। उन्होंने यह भी कहा कि उनकी मां हमेशा स्नेही और देखभाल करने वाली थीं, यहां तक कि उनके दोस्तों के प्रति भी वह वही स्वभाव रखती थीं। इसी ब्लॉग में उन्होंने अपने पिता के मित्र के पुत्र अब्बास का भी उल्लेख किया, जो उनके साथ रहता था। पीएम मोदी ने कहा कि मां हीराबेन ने अब्बास को बेटे की तरह ही पाला था।  पीएम मोदी ने कहा कि अब्बास अपने पिता के साथ पास के गांव में रहता था। लेकिन उसके पिता की असमय मौत हो गई। जिसके बाद मेरे पिता अब्बास को घर ले आए। पीएम मोदी ने कहा कि अब्बास अपनी पढ़ाई पूरी करने तक पीएम मोदी के परिवार के साथ रहे। वहीं अब्बास की चर्चा करने के बाद पीएम मोदी का ब्लॉग और अधिक सुर्खियों में आ गया। इसके बाद मीडिया में पीएम मोदी के बचपन के दोस्त अब्बास की खोज होने लगी। आखिर, अब्बास कौन हैं, कहां हैं? हालांकि, कुछ ही घंटों बाद ्अब्बास की सारी जानकारी निकलकर सामने आ गई। आइए जानते हैं आखिर अब्बास कौन हैं? अभी कहां हैं और क्या कर रहे हैं?

जानें अब्बास भाई कहां हैं और क्या कर रहे हैं?

पीएम मोदी के बचपन के दोस्त अब्बास इस समय ऑस्ट्रेलिया के सिडनी शहर में अपने छोटे बेटे के पास रहते हैं। जानकारी के अनुसार अब्बास के दो बेटे हैं। छोटा बेटा ऑस्ट्रेलिया तो बड़ा बेटा गुजरात के कासीम्पा गांव में रहता है। अब्बास सरकार में क्लास 2 कर्मचारी के तौर पर काम करते थे। वे फूड एंड सप्लाई विभाग में थे।

ईद पर मां अब्बास के लिए उसकी पसंद के पकवान बनाती थीं: पीएम मोदी

पीएम मोदी ने कहा कि ईद पर मां अब्बास के लिए उसकी पसंद के पकवान बनाती थीं। त्योहारों के समय आसपास के कुछ बच्चे हमारे यहां ही आकर खाना खाते थे। उन्हें भी मेरी मां के हाथ का बनाया खाना बहुत पसंद था। हमारे घर के आसपास जब भी कोई साधु-संत आते थे तो मां उन्हें घर बुलाकर भोजन अवश्य कराती थीं। जब वो जाने लगते, तो मां अपने लिए नहीं बल्कि हम भाई-बहनों के लिए आशीर्वाद मांगती थीं। उनसे कहती थीं कि मेरी संतानों को आशीर्वाद दीजिए कि वो दूसरों के सुख में सुख देखें और दूसरों के दुख से दुखी हों। मेरे बच्चों में भक्ति और सेवाभाव पैदा हो उन्हें ऐसा आशीर्वाद दीजिए।

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