Commonwealth Games: बर्मिंघम मैं छाए सुनपत आले, सामण म्ह ला दी सोने की झड़ी, लगे भारत मां के जयकारे


इंग्लैंड के बर्मिंघम में शनिवार का दिन सुनपत (सोनीपत) वालों के नाम रहा। सोनीपत वासियों को झूमने का सबसे पहला मौका फरमाणा की लाडली पूजा गहलोत ने दिया। उन्होंने देश को कांस्य दिलाया। उसके बाद तो सोनीपत का डंका बजता चला गया। रवि दहिया ने सोना जीता तो छत्रसाल स्टेडियम में भारत मां के जयकारे लगने लगे।

वहीं विनेश ने भी देश के लिए स्वर्णिम सफलता अर्जित की। खरखौदा में उसकी सास-ससुर व अन्य परिजन खुशी से झूमने लगे और मिठाइयां बांटकर खुशी को साझा किया। पुगथला के नवीन की जीत ने परिवार व ग्रामीणों में जोश भर दिया। सभी खुशी से नाचने लगे। 

शनिवार को देशवासियों की नजरें पहलवानों के मुकाबलों पर टिकी थी। दोपहर बाद तीन बजे शुरू हुई कुश्तियों का रोमांच रात होते-होते चरम पर पहुंच गया। चारों पहलवानों ने देशवासियों की उम्मीदों पर खरा उतरते हुए शानदार प्रदर्शन किया। ओलंपियन रवि दहिया, नवीन कुमार, विनेश फोगाट ने जहां सोने के तमगे जीते, वहीं पूजा गहलोत ने सेमीफाइनल में हार से उभरते हुए देश को कांस्य दिलाया।

दोपहर से ही दिल्ली के छत्रसाल स्टेडियम में रवि दहिया के भाई पहलवान पंकज दहिया और प्रशिक्षक अरुण कुमार के साथ अन्य पहलवानों ने जश्न मनाना शुरू कर दिया था। वहीं नवीन के गांव पुगथला में दोपहर से बेटे की पहली जीत के साथ परिजनों व ग्रामीणों में खुशियां मनानी शुरू कर दी थी। उधर खरखौदा की प्रताप कॉलोनी में विनेश फोगाट की ससुराल में बहू के फाइनल में सोना जीतते ही मिठाइयां बंटनी शुरू हो गई। जमकर जश्न मनाया गया। 

रवि की हर जीत पर साथियों ने लगाए भारत मां के जयकारे, जीत पर बांटी मिठाई 

गांव नाहरी के लाडले रवि दहिया की कुश्ती का सुबह से ही सभी को इंतजार था। क्वालीफाइंग राउंड में बाई मिलने के बाद क्वार्टर फाइनल में रवि ने अपने चिरपरिचित अंदाज में जीत दर्ज की। दिल्ली के छत्रसाल स्टेडियम में सुबह से कुश्ती देखने के लिए उनके साथी पहलवान उत्साहित थे।

रवि ने जैसे ही फाइनल में नाइजीरिया के एबिकेवेनिमो विल्सन को 10-0 से हराया तो साथियों ने मिठाई बांटनी शुरू कर दी। इससे पहले सेमीफाइनल में रवि ने पाकिस्तानी पहलवान अली अरशद को 14-4 से हराते हुए फाइनल में जगह बनाई थी। पाकिस्तानी पहलवान को हराते ही लोगों में जोश भर गया था। रवि की जीत पर उनके भाई पंकज दहिया, प्रशिक्षक अरुण दहिया और साथी पहलवानों ने भारत माता के जयकारों से स्टेडियम को गुंजायमान कर दिया। 

मेडल की खुशी पड़ोसी के गम में रही फीकी 

रवि दहिया के गांव में उनके मुकाबले को लेकर काफी तैयारी की गई थी। एक दिन पहले से गांव की चौपाल में स्क्रीन पर कुश्ती देखने का कार्यक्रम बनाया गया था। लेकिन रवि के पड़ोसी 33 वर्षीय युवक की ब्रेन हेमरेज से मौत के कारण जश्न के कार्यक्रम रद्द कर दिए गए। रेलवे में नियुक्त युवक की मौत के कारण पूरे गांव में मातम पसरा रहा।

विनेश ने पाया सोना तो झूम उठे ससुराल वाले 

खरखौदा की प्रताप कॉलोनी में पहलवान विनेश फोगाट की ससुराल में दोपहर से हर किसी को बहू के सोना जीतने की उम्मीद थी। विनेश ने पहली कुश्ती में ही विरोधी को चित्त कर अपने इरादे जाहिर कर दिए थे। विनेश के ससुराल वाले भी टीवी से चिपके रहे। विनेश के ससुर राजपाल राठी पूरे परिवार और अन्य परिजनों ने एकसाथ बहू के मुकाबले देखे। विनेश खरखौदा में होती है तो प्रताप स्कूल में अभ्यास करती हैं। प्रताप स्कूल के पहलवानों में विनेश की जीत से जोश भर गया। विनेश के कोच द्रोणाचार्य अवॉर्डी ओमप्रकाश दहिया भी विनेश के घर पर मुकाबले देखने के लिए दोपहर को ही पहुंच गए थे। रिश्तेदारियों और अन्य कई दोस्त भी विनेश के घर पर जमे थे। हालांकि विनेश के पति सोमवीर राठी को काम के सिलसिले में अजमेर जाना पड़ा लेकिन वह भी मोबाइल पर मुकाबले देखते रहे। बहू के सोना जीतते ही परिजनों ने जमकर खुशी मनाई। मिठाई बांटकर एक दूसरे को बधाई दी। 

नवीन ने पाकिस्तानी को पटखनी दी तो नाचने लगे परिजन 

पुगथला के पहलवान नवीन मलिक ने जैसे ही पाकिस्तान के पहलवान मोहम्मद शरीफ ताहिर को 9-0 से पटखनी दी तो परिजन व ग्रामीण खुशी से झूमने लगे। मिठाई बांटकर बेटे की जीत पर खुशी मनाई। पहलवान नवीन मलिक के गांव पुगथला में दोपहर से ही खुशी का माहौल था। नवीन की कुश्ती देखने के लिए परिजन व ग्रामीण टीवी के सामने आ जमे थे। नवीन जब भी प्वाइंट जीतते वैसे ही उनका घर तालियों से गूंज उठता।

सोना जीतने के बाद एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर खुशी मनाई। नवीन के पिता धर्मपाल का का कहना है कि हमें बेटे की उपलब्धि पर गर्व है। उनके अलावा उनकी मां गुणमति, भाई प्रवीन व ग्रामीणों ने नवीन के बेहतरीन खेल पर एक-दूसरे को बधाई दी। बेटे की जीत पर नवीन के माता-पिता की आंखों में खुशी के आंसू नजर आए। पिता धर्मपाल ने कहा कि उनका साधारण सा परिवार है और खेती कर अपना गुजर बसर करते हैं। 

बड़े भाई से सीखकर कुश्ती के प्रति बढ़ा रुझान 

नवीन के बड़े भाई प्रवीन भी पहलवान हैं। अपने भाई की पहलवानी को देखते देखकर नवीन को भी पहलवानी का शौक हुआ, इसके बाद पिता ने नवीन को भी प्रशिक्षण लेने भेज दिया। वर्ष 2016 तक दोनों भाइयों ने सोनीपत के कोच बलवान सिंह के पास प्रशिक्षण लिया। वर्ष 2016 में उनके बड़े भाई प्रवीन का नेवी में चयन हो गया। इसके बाद प्रवीन के साथ-साथ नवीन भी नेवी की टीम के साथ प्रशिक्षण लेने लगा। इस दौरान उसने कई राष्ट्रीय स्तरीय प्रतियोगिताओं में स्वर्ण जीता। हाल ही में नवीन ने एशियाई कुश्ती चैंपियनशिप में स्वर्ण जीता था। 

बेटे को भैंस का दूध पिलाकर बनाया पहलवान 

पिता धर्मपाल ने बताया कि उन्होंने भैंस का दूध पिलाकर अपने बेटे को पहलवान बनाया है। अब उन्हें अपने बेटे के प्रदर्शन पर गर्व है। अब उन्हें पूरी उम्मीद है कि बेटा ओलंपिक में भी सोना जीतकर लाएगा। जिससे उन्हें और भी ज्यादा खुशी मिलेगी। 

नौ सेकेंड में सुनहरी उम्मीद कांस्य में सिमटी 

गांव फरमाणा की पूजा गहलोत ने शनिवार को पहली कुश्ती से ही बेहतर प्रदर्शन शुरू कर दिया था। हालांकि सेमीफाइनल मुकाबले के महज अंतिम नौ सेकेंड में सोने का सपना कांस्य में बदल गया। पहले मैच में स्कॉटलैंड की पहलवान को 10 अंकों से हराने वाली पूजा ने अपने इरादे जाहिर कर दिए थे। स्कॉटलैंड की पहलवान वही थी जिसने दंगल फिल्म में भी अभिनय किया था।

सेमीफाइनल में भी पूजा छह अंकों की बढ़त बनाए हुए थी लेकिन आखिरी के नौ सेकेंड वह लय को बरकरार नहीं रख सकी और सोना पाने की दौड़ से बाहर हो गई। परिवार के सदस्य भी पूजा की हार से मायूस जरूर हुए लेकिन वह इसे खेल का हिस्सा मानते हुए फिर मैच देखने लगे।

पूजा के पहले कोच व ताऊ धर्मबीर ने बताया कि वह अपनी पत्नी किताबो देवी, छोटे भाई जसबीर, पूजा के पिता बिजेंद्र, मां जगवंती, पूजा के दोनों भाई अंकित व पुष्पेंद्र और पूजा की छोटी बहन ममता टीवी के सामने जम रहे। आखिर में बेटी ने देश को कांस्य पदक दिला दिया। जिसके बाद परिवार के सदस्यों ने मिठाई बांटी और खुशी सांझा की।



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