70% महिलाएं खुद पर होने वाले अत्याचारों के खिलाफ रहती हैं चुप- सर्वे

Women Silence on oppression: आमतौर पर ऐसा माना जाता है कि महिलाएं सहनशील होती हैं, वो सब कुछ चुपचाप सहन करती रहती हैं. भारतीय परिपेक्ष में देखें तो बहुत हद तक ये बात सच भी है. हमारे समाज में शुरू से ही महिलाओं को कम बोलने ही हिदायत दे दी जाती है. बचपन से लेकर बड़े होने तक और बड़े होने से लेकर बुजुर्ग होने तक उसे कदम-कदम पर इन्हीं हिदायतों और पाबंदियों में जीना होता है. इसीलिए महिला के लिए सहनशील होने की उपमा लगा दी गई  लेकिन अगर अपने ऊपर होने वाले अत्याचारों को लेकर चुप्पी नहीं तोड़ी जाए, तो ये जानलेवा हो सकती है. ऐसी सहनशीलता देश और पूरे समाज के लिए खतरे की घंटी है.

एनएफएचएस-5 (NFHS -5) यानी नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे (National Family Health Survey 5) की रिपोर्ट के अनुसार, देश में 11 राज्यों और एक केंद्रशासित प्रदेश की करीब 70 फीसदी महिलाएं खुद पर होने वाले अत्याचारों के बारे में कभी नहीं बताती हैंं और ना कभी किसी से किसी तरह की मदद लेती हैं. इस रिपोर्ट के मुताबिक, देश में असम-बिहार, मणिपुर, सिक्किम और जम्मू कश्मीर जैसे प्रदेश ऐसे हैं जिनमें हिंसा सहने वाली महिलाओं का प्रतिशत सबसे अधिक हैं. इन राज्यों में ऐसी महिलाओं की संख्या 80 प्रतिशत से ज्यादा है. वहीं त्रिपुरा, तेलंगाना, पश्चिम बंगाल, महाराष्ट्र, गोवा, गुजरात और आंध्र प्रदेश में हर जुल्म को चुपचाप सह लेने वाली महिलाओं की सख्या 70 फीसदी से ज्यादा है.

मदद मांगने वाली महिलाएं 
अगर बात जुल्म के खिलाफ आवाज उठाने या मदद मांगने की करें तो ये आंकड़े काफी निराशाजनक है. एनएफएचएस-5 (NFHS -5) के अनुसार, देश में 10 फीसदी से कम ही ऐसी महिलाएं हैं, जो खुद पर होने वाले अत्याचारों को लेकर दूसरों से मदद मांगती हैं.

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असम, आंध्र प्रदेश, बिहार, गोवा, हिमाचल प्रदेश, मणिपुर, नागालैंड और जम्मू कश्मीर ऐसे राज्य और केंद्र शासित प्रदेश हैं, जहां 10 फीसदी से भी कम महिलाएं अपने ऊपर होने वाले अत्याचारों को लेकर मददगार तलाशती हैं.

मदद के लिए पहला दरवाजा
इस सर्वे के दौरान हिंसा और अत्याचारों से पीड़ित महिलाओं ने बताया कि वो मदद के लिए सबसे पहले अपने परिवार वालों, पड़ोसी, पुलिस, वकील और धर्म गुरुओं तक की मदद लेती हैं.

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यहां लगती है सबसे ज्यादा चोट
सर्वे के अनुसार, घरेलू हिंसा से पीड़ित महिलाओं को सबसे ज्यादा चोट आंखों पर, हड्डियों के टूटने, जलने, कटने और दांत तोड़े जाने जैसी घटनाओं में आती है.

Tags: Crime against women, Domestic violence, Lifestyle

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