हार्ट डिजीज से बचाती है अखरोट और अलसी, ओमेगा-3s का है शाकाहारी विकल्प

Walnuts and flaxseed protect against heart disease : धमनी यानी आर्टरी (Artery) और हार्ट रोगों से बचाव में सही खानपान और दिनचर्या की अहम भूमिका होती है. अब एक नई स्टडी में पाया गया है कि अखरोट (walnuts) और अलसी (flaxseeds) में पाए जाने वाले अल्फा-लिनोलनिक एसिड (alpha-linolenic acid) यानी एएलए (ALA) के सेवन से कार्डियोवस्कुलर डिजीज (cardiovascular disease) का रिस्क 10 प्रतिशत तक कम होता है. साथ ही आर्टरी और हार्ट से जुड़े जानलेवा रोगों के खतरे को भी 20 प्रतिशत तक कम करता है. पेन स्टेट यूनिवर्सिटी के कॉलेज ऑफ हेल्थ एंड ह्यूमन डेवलमेंट में न्यूट्रिशनल साइंसेज की प्रोफेसर पेन्नी क्रिस-इथरटॉन (Penny M. Kris-Etherton) के अनुसार, वैसे ओमेगा-3 फैटी एसिड (Omega-3 Fatty Acid) की जरूरत पूरा करने के कई तरीके बताए जाते है. लेकिन कई लोग ऐसे हैं, जो विभिन्न कारणों से सी-फूड नहीं खाना चाहते हैं और उनमें हार्ट डिजीज का खतरा कम करने के लिए ओमेगा-3एस जरूरी होता है.

ऐसे लोगों के लिए अखरोट और अलसी में पाए जाने वाले एएलए के सेवन से वही फायदा मिलता है. खासकर फल-सब्जियों और साबुत अनाज के साथ इसे लेने से ज्यादा फायदा मिलता है. इस स्टडी का निष्कर्ष ‘एडवांसेज इन न्यूट्रिशन (Advances in Nutrition)’ नामक जर्नल में प्रकाशित हुआ है.

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न्यूट्रिशन की प्रोफेसर जेनिफर फ्लेमिंग (Jennifer Fleming) का कहना है कि उन्हें भी ऐसे प्रमाण मिले हैं कि जो लोग सी-फूड खाते हैं, उन्हें भी वनस्पति आधारित ओमेगा-3एस (omega-3s) के सेवन से अतिरिक्त फायदा मिलता है. जिन लोगों में ओमेगा-3एस का लेवल कम होता है, वे यदि अपने खाने में एएलए को शामिल करते हैं तो उनकी कार्डियोवस्कुलर हेल्थ में सुधार होता है. लेकिन जिन लोगों में ओमेगा-3एस का लेवल हाई होता है, वे यदि अन्य स्रोतों से एएलए का सेवन करते हैं, तो उन्हें भी फायदा होता है. इसका मतलब है कि एएलए अन्य ओमेगा-3एस के साथ मिलकर काम करता है.

कैसे हुई स्टडी
इस स्टडी के रिसर्चर्स ने पहली की स्टडीज के डेटा से एएलए का हार्ट रोग और ब्लड प्रेशर और सूजन या जलन जैसे हार्ट डिजीज के कारकों के संबंध में एएलए के प्रभाव का आंकलन किया है. स्टडी में औचक नियंत्रित परीक्षण (Randomized Controlled Trials) और अवलोकनात्मक स्टडी (Observational Studies) भी शामिल किए गए हैं. अवलोकनात्मक स्टडी प्रतिभागियों की उस रिपोर्ट पर आधारित थी, जिसमें ये बताया गया था कि उन्होंने एएलए का सेवन किस प्रकार से खास खाद्य पदार्थों के जरिए किया है. जबकि अन्य में बायोमार्कर के जरिए ब्लड में एएलए के लेवल का मापन किया गया.

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इस स्टडी की मेन राइटर एलिक्स सला विला (aleix sala-vila) ने बताया कि सही पोषण और व्यक्तिगत तौर पर दी गई दवा के आधार पर हमें उन लोगों की पहचान करने से पहले ज्यादा जानकारी मिली कि किस व्यक्ति को एएलए से भरपूर पदार्थ का ज्यादा सेवन कराने से सबसे अधिक फायदा होता है. इस क्रम में ब्लड में एएलए की मात्रा पर ज्यादा फोकस करने पर हार्ट पर उसके असर को परखने में मदद मिली.

स्टडी का निष्कर्ष
स्टडी के विश्लेषण में रिसर्चर्स ने पाया कि एथोरोजेनिक लिपिड (atherogenic lipids) और लिपोप्रोटीन (lipoproteins) का लेवल कम करने में एएलए से फायदा मिला. रिसर्चर एमिलियो रास ने बताया कि इस निष्कर्ष से हार्ट संबधी हेल्थ पर एएलए का फायदा जानने से आसानी होगी. उन्होंने बताया कि आहार संबंधी गाइडलाइंस ऐसी होनी चाहिए कि दैनिक ऊर्जा की जरूरत में एएलए की हिस्सेदारी 0.6 से एक प्रतिशत तक हो. उसके लिए महिलाओं को दैनिक 1.1 ग्राम और पुरुषों को 1.6 ग्राम जरूरत होती है. इसके लिए आधा औंस अखरोट या सिर्फ एक चम्मच अलसी का तेल पर्याप्त हो सकता है.

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