स्वाद का सफरनामा: सीनियर सिटीजन फैमिली ने बनाया क्लाउड किचन, यहां बने फास्ट फूड लें का मज़ा, VIDEO भी देखें

हाइलाइट्स

दिल्ली में एक सीनियर सिटीजन दंपति ने क्लाउड किचन शुरू किया है.
बुजुर्ग दंपति द्वारा संचालित क्लाउड किचन में 200 से ज्यादा फूड वैराइटीज़ हैं.

Swad Ka Safarnama: सरकारी नौकरी से रिटायर होने के बाद उनके पास काम करने को कुछ नहीं था. पत्नी भी घर में खाली थी. एक बेटा है जो अपना अलग ही काम करना चाहता है. ऐसे में ये सीनियर सिटीजन पति-पत्नी क्या करते. आय का जरिया भी सीमित था, लेकिन कोई भारी-भरकम काम भी नहीं कर सकते थे. दोनों में एक नेचुरल गुण यह था कि वे स्वादिष्ट खाना बनाने और उसे खिलाने के शौकीन थे. सोचा, कि इसी में हाथ आजमा लिया जाए. बढ़ती उम्र में स्टार्टअप के रूप में उन्होंने अपने आशियाने में ही ‘क्लाउड किचन’ बना लिया और ऑर्डर पर लोगों को भोजन सर्व करने लगे. बस उम्मीद है कि यह मनपसंद काम चल निकले, जिससे उनका मन भी प्रसन्न रहे और फाइनेंस सपोर्ट भी मिलती रहे. आज एक ऐसे ही परिवार से हम आपको मिलाने लिए जा रहे हैं.

आधुनिक उपकरणों से बना हुआ है क्लाउड किचन

पहले यह जान लें कि क्लाउड किचन क्या है और यह कैसे काम करता है, जिसमें इस बुजुर्ग फैमिली की रुचि जागी. असल में यह एक नई अवधारणा (Concept) है जो भारत में नई है लेकिन बहुत तेजी से स्थापित हो रही है. यह एक ऐसा किचन होता है, जो केवल ऑनलाइन/ऑफलाइन/टेलीफोन ऑर्डरिंग सिस्टम के माध्यम से आने वाले ऑर्डर लेता है. यह एक बेस किचन होता है, जहां कोई डाइन-इन सुविधा नहीं होती. वहां बैठकर खाना खाने की सुविधा नहीं होती. यह खाने का आर्डर लेकर आप तक पहुंचाता है.


बुजुर्गों का यह क्लाउड किचन चितरंजन पार्क में सुधीर शर्मा और उनकी पत्नी मंजू शर्मा चला रहे हैं. उन्होंने ग्राउंड फ्लोर पर हाइजनिक क्लाउड किचन बनाई है, जहां पीएनजी या रसोई गैस का कोई काम नहीं है. खाना बनाने के सारे उपकरण बिजली से चलते हैं. खाना बनाने और खिलाने की समझ और शौक पहले से ही था, इसलिए फास्ट फूड/कॉन्टिनेंटल फूड पर हाथ जमाया. इसके लिए जब ऑनलाइन खोजबीन शुरू की तो फास्ट फूड की तीन कंपनियों पाव मेन (Pav Man), हीरो सेंडविच (Hero Sandwich) व व्हाट ए सेंडविच (What A Sandwich) के साथ उन्होंने करार किया.

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200 से अधिक फास्ट फूड/कॉन्टिनेंटल फूड बनाते हैं

इन तीनों कंपनियों के 200 से अधिक वेज व नॉनवेज फास्ट फूड व कॉन्टिनेंटल फूड्स आइटम हैं, जिन्हें ये बुजुर्ग दंपति तैयार करते हैं. इनमें रैप (Wrap), बर्गर, सैंडविच, कटलेट, टिक्का, नगेट, फ्रेंच फ्राइज, सलाद से लेकर बहुत कुछ शामिल है. दोनों पति-पत्नी बहुत व्यस्त रहते हैं, क्योंकि मसला ऑनलाइन ऑर्डर से लेकर आहार को बनाने का भी है. जैसे ही खाना सप्लाई करने वाली नामी कंपनियों से उनके लैपटॉप पर ऑर्डर का अलर्ट आता है, उनकी व्यस्तता बढ़ जाती है. खाना बनाने का तरीका हाईटेक है. फ्रीज, फ्रीजर के अलावा फ्राई व ग्रिल मशीनों से क्वॉलिटी कंपनियों के रॉ फूड् मटेरियल्स (Raw Food Materials) से मैन्यू वाले ऑर्डर बनाने शुरू कर दिए जाते हैं. दोनों मिलकर मेहनत करते हैं, छीलने-काटने फ्राई करने से लेकर उन्हें सजाने तक की जिम्मेदारी है. पैकिंग के लिए एक लड़का रखा हुआ है. ऑर्डर बॉय आते हैं, ऑर्डर उठाते हैं और लेकर चले जाते हैं.

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बढ़ती उम्र, लेकिन मन का काम, इसलिए थकान नहीं होती

दोनों खासे व्यस्त रहते हैं. सुबह किचन को संवारने, रॉ मटेरियल को लाने और अन्य काम होते हैं. दोपहर 12 बजे से रात 10 बजे तक उनकी व्यस्तता रहती है. खाने में और अधिक स्वाद भरने के लिए वे आपस में विचार-विमर्श से लेकर बहस भी करते हैं, क्योंकि यह उनके जीवन के आर्थिक पक्ष से भी जुड़ा हुआ है. उम्र और थकान जब-तब हाथ रोकने का प्रयास करती है, लेकिन वे हार नहीं मानते और काम करते रहते हैं. 69 वर्षीय सुधीर शर्मा बताते हैं उनके सभी आइटमों की रेंज 29 रुपये से लेकर 450 रुपये के बीच है. कुछ खास आइटम पर डिस्कांउट भी देते हैं. बस अच्छी बात यह है कि सारा कामकाज घर से ही चल रहा है.

यहां मिलने वाले सभी आइटमों की रेंज 29 रुपये से लेकर 450 रुपये के बीच है.

वह कहते हैं कि इनकम का कोई साधन नहीं था, इसलिए काम करना मजबूरी थी, लेकिन अच्छी बात यह है कि यह काम हमारे मन से जुड़ा है, इसलिए काम करने में थकान महसूस नहीं होती. उनका कहना है कि कभी-कभी लोगों के पर्सनल ऑर्डर भी आते हैं, उन्हें तैयार करने में भी खासा आनंद मिलता है. कॉन्सेप्ट नया और अनूठा है, लेकिन तेजी से आगे बढ़ रहा है. हम सीनियर सिटीजन को भी पूरी उम्मीद है कि हमारा काम भी कामयाब हो. खास बात यह है कि जब ऑर्डर बॉय ऑर्डर लेने आते हैं तो उनके कामकाज को देखकर हैरान होते हैं, फिर जाते-जाते प्रशंसा कर जाते हैं.

Tags: Food, Lifestyle

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