स्कूल में खेल-कूद से दूर भागता है बच्चा? कहीं ये वजह तो नहीं

हाइलाइट्स

कई बच्चे शारीरिक दिक्कत की वजह से खेल-कूद में भाग लेने से हिचकिचाने लगते हैं.
बच्चा पार्टीसिपेट नहीं कर पा रहा है तो पैरेंट्स को टीचर और बच्चे दोनों से बात करनी चाहिए.

Child Care Tips: बच्चों के शारीरिक और मानसिक विकास के लिए जितनी जरूरी पढ़ाई है, उतनी ही आवश्यक फिजिकल एक्टीविटी भी है. वर्तमान में स्कूलों में बच्चों की फिजिकल हेल्थ पर काफी जोर दिया जाने लगा है. इसके लिए स्पोर्ट्स क्लासेस, कॉम्पटीशंस और योग क्लास का आयोजन किया जाता है. इतनी फैसिलिटी होने के बाद भी क्या बच्चा स्कूल में होने वाली खेल-कूद व अन्‍य एक्टीविटीज़ में भाग नहीं लेता है? अगर नहीं, तो इसके पीछे कोई कारण जरूर होगा. बच्चा जब स्कूल में पार्टीसिपेट करने से इंकार करता है तो उसका साथ न दें, ​बल्कि कारण जानने का प्रयास करें.

कई बार बच्चे फिजिकली वीक होते हैं, जिस वजह से वह खेल-कूद में ज्यादा रुची नहीं लेते. वहीं कुछ बच्चे हारने के डर से पार्टीसिपेट नहीं करते. ऐसे कई कारण हैं जो बच्चे पर मानसिक रूप से असर डालते हैं. चलिए जानते हैं उन कारणों के बारे में जिनकी वजह से बच्चा खेल-कूद में भाग नही लेता.

बच्चे के खेल-कूद में भाग न लेने के कारण

बच्चे का खराब बिहेवियर
वेरीवैल फैमिली के अनुसार कई बार बच्चे खराब ​बिहेवियर की वजह से क्लास से बाहर कर दिए जाते हैं. ऐसे बच्चों को टीचर्स भी खेल-कूद में पार्टीसिपेट करने में दिलचस्पी नहीं दिखाते. यदि बच्चा इस वजह से पार्टीसिपेट नहीं कर पा रहा है तो पैरेंट्स को टीचर और बच्चे दोनों से बात करनी चाहिए और बच्चे के बिहेवियर को सुधारने का प्रयास किया जाना चाहिए.



हो सकती है शारीरिक दिक्कत

कई बच्चों को शारीरिक दिक्कत होती है जिस वजह से वे खेल-कूद में भाग लेने से हिचकिचाने लगते हैं. पैर में चोट, लंगड़ाकर चलना, तेज भाग न पाने की वजह से बच्चे दूसरों के सामने परफॉर्म करने में शर्माते हैं. ऐसे में उन्हें मोटीवेट करें और स्कूल कॉम्पटीशन में पार्टीसिपेट कराएं.

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हारने का डर
बच्चों में कॉम्पटीशन की भावना अधिक होती है. ज्यादातर बच्चे किसी दूसरे बच्चे को अपने से आगे निकलता नहीं देख पाते. स्कूल कॉम्पटीशन या क्लास में बच्चों को हारने का डर अधिक होता है और वह इसी डर से पार्टीसिपेट करने से मना करने लगते हैं. जीतने की भावना अच्छी होती है लेकिन बच्चों को हार का सामना भी करना आना चाहिए. बच्चे के इस डर को दूर करने के लिए पैरेंट्स उन्हें सपोर्ट करें और हार व जीत दोनों ही पहलुओं के बारे में समझाएं.

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