सुप्रीम कोर्ट: दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले में दखल देने से किया इनकार, कालकाजी मंदिर से अतिक्रमण हटाने का मामला

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: गौरव पाण्डेय
Updated Fri, 25 Mar 2022 05:50 PM IST


सार

दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार को फैसला सुनाया था कि कालकाजी मंदिर से अतिक्रमण तुरंत हटाया जाए और वहां अवैध रूप से रहने वाले लोगों को भी हटाया जाए। हाईकोर्ट ने कहा था कि नवरात्र में मंदिर में भारी भीड़ रहती है। परिसर में अवैध झुग्गियों व धर्मशालाओं के कारण श्रद्धालुओं के लिए खतरा हो सकता है।

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सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कालकाजी मंदिर से अतिक्रमण हटाने के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले में दखल देने से इनकार कर दिया। हाईकोर्ट ने गुरुवार को दक्षिण दिल्ली में स्थित कालकाजी मंदिर से अतिक्रमण, अवैध दुकानदारों और दुकानों को तत्काल प्रभाव से हटाने का निर्देश दिया था।

न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ और सूर्यकांत की पीठ ने कहा कि हम याचिका पर विचार करने के लिए बाध्य नहीं हैं। हम याचिकाकर्ता को साथ हाईकोर्ट की ओर से नियुक्त किए गए प्रशासक के पास जाने की आजादी देते हैं। प्रशासक रिपोर्ट को उचित दिशानिर्देश के लिए हाईकोर्ट के सामने पेश करेगा।

पीठ ने यह निर्देश देते हुए कहा कि कुछ मामलों में हमें अपने हाईकोर्ट पर भरोसा करने की जरूरत होती है। हम सब हाईकोर्ट के न्यायाधीश रहे हैं। हम यहां पर हर मामले के लिए अपीलीय मंच के रूप में काम नहीं कर रहे हैं। पीठ ने कहा कि हमें न्याय की देवी की गरिमा को बनाए रखना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता से कहा कि हमने हाईकोर्ट का फैसला देखा है। हाईकोर्ट ने जिस कारण पर विचार किया है वह यह है कि नवरात्र की शुरुआत हो रही है और आप केवल पैसा कमाने में रुचि रखते हैं। हालांकि, पीठ ने यह भी कहा कि हटाए जाने वाले लोगों का पुनर्वास भी किया जाएगा।

दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार को दिया था ये फैसला
हाईकोर्ट ने गुरुवार को दिल्ली पुलिस को कालकाजी मंदिर परिसर में बनी अवैध झुग्गियों और धर्मशालाओं में रह रहे लोगों को तत्काल हटाने का निर्देश दिया था। अदालत ने कहा था कि दो अप्रैल से शुरू हो रहे नवरात्र उत्सव के बीच मंदिर में श्रद्धालुओं के लिए समुचित प्रबंध करने की आवश्यकता है।

न्यायाधीश प्रतिभा एम सिंह ने कहा था कि नवरात्र में मंदिर दर्शन के लिए हजारों लोग दर्शनों के लिए आते हैं। ऐसे में परिसर में अवैध झुग्गियों व धर्मशाला में लोगों का रहने देने से श्रद्धालुओं की सुरक्षा को खतरा खतरा हो सकता है। हमारे पास पुलिस को आदेश देने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है 

विस्तार

सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कालकाजी मंदिर से अतिक्रमण हटाने के मामले में दिल्ली हाईकोर्ट के फैसले में दखल देने से इनकार कर दिया। हाईकोर्ट ने गुरुवार को दक्षिण दिल्ली में स्थित कालकाजी मंदिर से अतिक्रमण, अवैध दुकानदारों और दुकानों को तत्काल प्रभाव से हटाने का निर्देश दिया था।

न्यायाधीश डीवाई चंद्रचूड़ और सूर्यकांत की पीठ ने कहा कि हम याचिका पर विचार करने के लिए बाध्य नहीं हैं। हम याचिकाकर्ता को साथ हाईकोर्ट की ओर से नियुक्त किए गए प्रशासक के पास जाने की आजादी देते हैं। प्रशासक रिपोर्ट को उचित दिशानिर्देश के लिए हाईकोर्ट के सामने पेश करेगा।

पीठ ने यह निर्देश देते हुए कहा कि कुछ मामलों में हमें अपने हाईकोर्ट पर भरोसा करने की जरूरत होती है। हम सब हाईकोर्ट के न्यायाधीश रहे हैं। हम यहां पर हर मामले के लिए अपीलीय मंच के रूप में काम नहीं कर रहे हैं। पीठ ने कहा कि हमें न्याय की देवी की गरिमा को बनाए रखना चाहिए।

सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता से कहा कि हमने हाईकोर्ट का फैसला देखा है। हाईकोर्ट ने जिस कारण पर विचार किया है वह यह है कि नवरात्र की शुरुआत हो रही है और आप केवल पैसा कमाने में रुचि रखते हैं। हालांकि, पीठ ने यह भी कहा कि हटाए जाने वाले लोगों का पुनर्वास भी किया जाएगा।

दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार को दिया था ये फैसला

हाईकोर्ट ने गुरुवार को दिल्ली पुलिस को कालकाजी मंदिर परिसर में बनी अवैध झुग्गियों और धर्मशालाओं में रह रहे लोगों को तत्काल हटाने का निर्देश दिया था। अदालत ने कहा था कि दो अप्रैल से शुरू हो रहे नवरात्र उत्सव के बीच मंदिर में श्रद्धालुओं के लिए समुचित प्रबंध करने की आवश्यकता है।
न्यायाधीश प्रतिभा एम सिंह ने कहा था कि नवरात्र में मंदिर दर्शन के लिए हजारों लोग दर्शनों के लिए आते हैं। ऐसे में परिसर में अवैध झुग्गियों व धर्मशाला में लोगों का रहने देने से श्रद्धालुओं की सुरक्षा को खतरा खतरा हो सकता है। हमारे पास पुलिस को आदेश देने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है
 

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