‘सजावटी फल’ कमरख का स्वाद चखा है कभी? आयुर्वेद और आधुनिक विज्ञान भी मानता है इसका लोहा, जानें दिलचस्प बातें

हाइलाइट्स

मलेशिया में कमरख से जैम और कैंडी बनाई जाती है.
थाईलैंड में कमरख का अचार बनाया जाता है.

Star Fruits Fun Facts And Benefits: कमरख (Star Fruit या Carambola) एक मौसमी फल है और खट्टेपन में इसका जवाब नहीं. यही खटास इसमें विटामिन सी भरती है. यह एंटिऑक्सीडेंट भी है, जो कोशिकाओं को दुरुस्त रख शरीर को जवान बनाए रखने में मददगार है. इसमें फाइबर भी खूब है जो पेट के लिए लाभकारी है.

कमरख के और भी कई गुण हैं. पूरी दुनिया में इसके फैलने का इतिहास खासा ‘रसभरा’ है. जानिए, इससे जुड़ी रोचक बातें

अमेरिका में इसे सजावटी फल माना जाता था

कमरख की विशेषता यह है कि पांच कोण के तारे जैसा दिखने वाला यह फल खाने में बेहद खट्टा है लेकिन जब यह मुंह में खत्म होता है तो हल्की सी मिठास पैदा करता है. अगर यह बहुत पक जाए तो इसका स्वाद मीठे में परिवर्तित हो जाता है. यही खट्टा-मीठापन इसमें अलग गुण पैदा करता है. अमेरिका के लिए यह फल नया है. जब यह 19वीं शताब्दी में वहां पहुंचा तो शुरू में इसे सजावटी फल मानकर डाइनिंग टेबल पर सजाया जाता रहा. पुराने वक्त में इसका प्रयोग दवाओं के लिए भी होता था. अब यह अलग ही रूप पा चुका है. भारत और दक्षिण पूर्वी एशिया में इसे सब्जी की करी, अचार, चटनी में डाला जाता है. इस फल को पीसकर चीनी डालकर चाशनी भी बनाई जाती है.

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पीतल-तांबे से जंग भी हटा देता है यह खट्टा फल

कई देशों में यह स्वादिष्ट रूप ले चुका है, वहां इसे पाई, पेस्ट्री, टार्ट्स के अलावा केक में बेक किया जाता है. मलेशिया में कमरख को सेब, चीनी और लौंग के साथ पकाया जाता है, जिसके बाद इसकी जैम और कैंडी बन जाती है. थाईलैंड में इसका अचार बनता है और दूसरे फलों के साथ मिलाकर इसकी चटपटी-तीखी चटनी बनाई जाती है. जमैका में इसे सुखाकर इस्तेमाल किया जाता है. चीन, कोरिया, फिलीपींस आदि देशों में चिकन, मछली, झींगा आदि सी फूड्स को कमरख से मैरिनेट किया जाता है. इसकी सॉस भी बनाई जाती है. खास बात यह है कि पीतल, तांबे से जंग हटाने के लिए भी इसका प्रयोग किया जाता है.

तांबे से जंग हटाने के लिए भी कमरख का प्रयोग किया जाता है.

कई भू-भागों में एक साथ देखा गया कमरख

कमरख की उत्पत्ति को लेकर कोई भ्रम नहीं है. लेकिन इस बात की जानकारी नहीं है कि इसका अवतरण पृथ्वी पर कौन से काल या समय में हुआ. बस यह जानकारी है कि कमरख को सैकड़ों सालों से खाया जा रहा है. भारत के प्राचीन आयुर्वेदिक ग्रंथों में जानकारी इसका प्रमाण है. खोजबीन यह दर्शाती है यह फल कई क्षेत्रों में एक साथ देखा गया, जिसमें दक्षिणी पूर्वी एशिया के देश, भारत समेत साउथ एशिया व चीन आदि शामिल हैं. आजकल इसकी उपज पेरू, कोलम्बिया, त्रिनिदाद, इक्वेडोर, गुयाना, ब्राजील और संयुक्त राज्य अमेरिका में भी खूब हो रही है. असल में दुनिया के सभी उष्णकटिबंधीय क्षेत्रों में भी इसे उगाया जा रहा है. कहा जाता है कि पुर्तगाली सौदागर इस फल को दक्षिण-पश्चिमी भारत के मालाबार क्षेत्र से अमेरिका लेकर गए. स्वीडिश वनस्पतिशास्त्री, चिकित्सक और जीव विज्ञानी कालॅ लीनियस (Carolus Linnaeus) ने वर्ष 1753 में लिखी अपनी पुस्तक Species Plantarum में आधुनिक वर्गीकरण करते हुए तारे के आकार के इस फल का नाम और अन्य जानकारी उपलब्ध कराई है.

आयुर्वेदिक औषधियों में भी किया जाता है इसका उपयोग 

भारत में 7वीं सदी ईसा पूर्व लिखे आयुर्वेदिक ग्रंथ ‘चरकसंहिता’ के ‘फलवर्ग:’ अध्याय में इसकी विशेषताओं की जानकारी दी गई है. कहा गया है कि कर्मरंगम् फल रस में मधुर, अम्ल, कषाय (कसैला), भारी, शीतल, पित्त कफ को शांत करने के अलावा मुंह की बदबू का भी शमन करता है. जाने-माने आयुर्वेदाचार्य व योगगुरु श्री बालकृष्ण ने कहा है कि कमरख व इसकी पत्तियों, जड़, फूल, बीजों का प्रयोग आयुर्वेद औषधियां बनाने के लिए भी किया जाता है. इनसे दमा, हार्ट, पेचिश, पेटरोग, पाइल्स की दवाएं बनाई जाती हैं. विशेष बात यह है कि चीन व अमेरिका की घरेलू दवाओं में पुराने सिरदर्द, दाद, संक्रामक रोगों व स्किन की सूजन में इसका प्रयोग किया जाता है. अमेरिका में ही इसकी सफेद मदिरा भी बनाई जाती है.

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‘चरकसंहिता’ के ‘फलवर्ग:’ अध्याय में इसकी विशेषताओं की जानकारी दी गई है.

आधुनिक विज्ञान ने भी कहा है इसे बेहद गुणकारी

आधुनिक विज्ञान का कहना है कि कमरख में एंटीऑक्सीडेंट, एंटी-इंफ्लेमेटरी और एंटी-माइक्रोबियल और फोलेट तत्व पाए जाते हैं. इसमें विटामिन सी, ए, कैरोटीन (स्किन, नर्वस सिस्टम, श्वसन तंत्र, डायबिटीज और गठिया जैसे रोगों में लाभकारी) और बी-कॉम्प्लेक्स विटामिन पोटेशियम, फास्फोरस, जस्ता और आयरन जैसे खनिज भी होते हैं. अमेरिकी कृषि विभाग (USDA) की जानकारी के अनुसार एक कप (132 ग्राम) स्टार फल में कैलोरी 41, फैट 0.4 ग्राम, सोडियम 2.6 मिलीग्राम, कार्बोहाइड्रेट 8.9 ग्राम, फाइबर 3.7 ग्राम, चीनी 5.3 ग्राम, प्रोटीन 1.4 ग्राम पाया जाता है. इन्हीं तत्वों के चलते कमरख को शरीर के लिए बेहद लाभकारी और स्वास्थ्यवर्धक माना जाता है.

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दिल, रक्त, पाचनतंत्र के लिए है बेहद लाभकारी

जानी मानी डायटिशियन अनीता लांबा के अनुसार इसमें उचित मात्रा में पाया जाने वाले सोडियम और पोटेशियम हमारे शरीर में इलेक्ट्रोलाइट्स के रूप में कार्य करते हैं, जिससे उचित रक्तचाप बनाए रखने में मदद मिलती है. यह फल दिल की धड़कन को नियमित और स्वस्थ रक्त प्रवाह भी सुनिश्चित करता है. इसमें मौजूद कैल्शियम शरीर की रक्त वाहिकाओं और धमनियों पर तनाव को भी दूर करते हैं, जिससे आपके दिल के दौरे या स्ट्रोक के जोखिम को कम करने में मदद मिलती है. इसमें मौजूद फाइबर स्टूल (Stool) को लचीला बनाते हैं, जिससे पाचन तंत्र सुधरता है और पेट में कब्ज, ऐंठन से बचाव होता है और वजन कंट्रोल में रहता है. शोध यह भी चल रहा है कि क्या कमरख में पाए जाने वाले विशेष तत्व कैंसर से भी बचाव कर सकते हैं.

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कमरख में पाए जाने वाले विशेष तत्व कैंसर से भी बचाव कर सकते हैं.

किडनी मरीजो को कमरख के सेवन से बचना चाहिए

उनका कहना है कि कमरख में प्रतिरोधी क्षमता है, जिससे शरीर की कोशिकाएं दुरुस्त रहती हैं और शरीर में सूजन से बचाव होता है. इसका रस बलगम और कफ को काटता है, जिससे यह श्वसन संक्रमण में लाभ देता है. एक स्वस्थ शरीर के लिए कमरख का उपयोग नुकसानदायक नहीं है, लेकिन किडनी की परेशानी झेल रहे लोगों को इसके सेवन से बचना चाहिए.

असल में इसमें मौजूद न्यूरोटॉक्सिन नामक विषैला तत्व मस्तिष्क व नर्वस सिस्टम में विकार पैदा कर सकता है, परंतु स्वस्थ किडनी वाले लोगों में यह तत्व शरीर से बाहर निकल जाता है, पर किडनी बीमारी से जुड़े लोगों में यह बाहर नहीं निकल पाता और गंभीर बीमारी का कारण बन सकता है. इसका अधिक सेवन हिचकी, मानसिक भ्रम की स्थिति का भी कारण बन सकता है.

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