लखीमपुर खीरी कांड: आशीष मिश्रा की जमानत को क्यों नहीं दी चुनौती, यूपी सरकार से सुप्रीम कोर्ट ने मांगा जवाब

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: सुरेंद्र जोशी
Updated Wed, 30 Mar 2022 11:33 AM IST


सार

सुप्रीम कोर्ट ने मिश्रा की जमानत निरस्त करने की अर्जी पर आगे सुनवाई 4 अप्रैल को तय की है। इसके पूर्व कोर्ट ने समिति द्वारा जमानत निरस्त करने की सिफारिश की जानकारी दी।

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यूपी के चर्चित लखीमपुर खीरी कांड के आरोपी आशीष मिश्रा की जमानत का मामला उलझता जा रहा है। इस कांड की जांच की निगरानी के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित समिति ने जमानत रद्द कराने के लिए इसे चुनौती देने की सिफारिश की थी। चुनौती नहीं देने पर सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार से जवाब मांगा है। 

सुप्रीम कोर्ट ने मिश्रा की जमानत निरस्त करने की अर्जी पर आगे सुनवाई 4 अप्रैल को तय की है। मिश्रा की जमानत को पीड़ितों के परिजनों ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। आशीष केंद्रीय गृह राज्यमंत्री अजय मिश्रा टेनी के पुत्र हैं। 

बुधवार को सुनवाई के दौरान शीर्ष कोर्ट ने यूपी सरकार से निगरानी समिति की सिफारिश के बावजूद जमानत को चुनौती नहीं देने पर जवाब मांगा है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा बनाई गई निगरानी समिति ने यूपी सरकार से कहा था कि वह आशीष मिश्रा को जमानत देने के इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दे। 

जमानत अर्जी का विरोध किया था : यूपी सरकार
मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान यूपी सरकार ने कहा था कि उसने मिश्रा की जमानत अर्जी का विरोध किया था। याचिकाकर्ता का यह आरोप पूरी तरह गलत है कि राज्य सरकार ने अर्जी का प्रभावी ढंग से विरोध नहीं किया। वहीं, यूपी पुलिस ने शीर्ष कोर्ट से कहा था कि राज्य सरकार ने लखीमपुर खीरी केस के गवाहों व पीड़ितों के परिजनों की सुरक्षा के सारे इंतजाम किए हैं। सभी गवाहों से उनकी सुरक्षा को लेकर नियमित संपर्क भी किया जा रहा है। 

आशीष मिश्रा को दी गई जमानत के खिलाफ पीड़ित परिवारों की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में कहा गया है कि हाईकोर्ट ने उन्हें जमानत देते समय शीर्ष अदालत के दिशा-निर्देशों की अवहेलना की। आरोपी आशीष मिश्रा को इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने बीते दिनों जमानत दी थी। जमानत मंजूर होने के बाद ही मृत किसानों के परिजनों ने जमानत का विरोध किया था और इस आदेश को चुनौती देने की बात कही थी। 

एसयूवी से कुचले गए थे चार किसान
गत वर्ष 3 अक्तूबर को उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य की लखीमपुर खीरी जिले की यात्रा के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे चार किसान एक एसयूवी द्वारा कुचले जाने के बाद मारे गए थे। यह एसयूवी कथित तौर पर केंद्रीय गृह राज्यमंत्री अजय कुमार मिश्रा के काफिले का हिस्सा थी। मामले में केंद्रीय मंत्री मिश्रा के बेटे आशीष मिश्रा का नाम आया था। इसके बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।

लखीमपुर खीरी जिले के तिकुनिया गांव में हुई उक्त हिंसा के मामले में एसआईटी ने तीन महीने के अंदर सीजेएम अदालत में तीन जनवरी को 5000 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की थी। इसमें आशीष मिश्र को मुख्य आरोपी बनाते हुए 13 लोगों को मुल्जिम बताया था। इन सभी के खिलाफ सोची समझी साजिश के तहत हत्या, हत्या का प्रयास, अंग भंग की धाराओं समेत आर्म्स एक्ट के तहत कार्रवाई की थी।

विस्तार

यूपी के चर्चित लखीमपुर खीरी कांड के आरोपी आशीष मिश्रा की जमानत का मामला उलझता जा रहा है। इस कांड की जांच की निगरानी के लिए सुप्रीम कोर्ट द्वारा गठित समिति ने जमानत रद्द कराने के लिए इसे चुनौती देने की सिफारिश की थी। चुनौती नहीं देने पर सुप्रीम कोर्ट ने यूपी सरकार से जवाब मांगा है। 

सुप्रीम कोर्ट ने मिश्रा की जमानत निरस्त करने की अर्जी पर आगे सुनवाई 4 अप्रैल को तय की है। मिश्रा की जमानत को पीड़ितों के परिजनों ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है। आशीष केंद्रीय गृह राज्यमंत्री अजय मिश्रा टेनी के पुत्र हैं।

बुधवार को सुनवाई के दौरान शीर्ष कोर्ट ने यूपी सरकार से निगरानी समिति की सिफारिश के बावजूद जमानत को चुनौती नहीं देने पर जवाब मांगा है। सुप्रीम कोर्ट द्वारा बनाई गई निगरानी समिति ने यूपी सरकार से कहा था कि वह आशीष मिश्रा को जमानत देने के इलाहाबाद हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती दे।

जमानत अर्जी का विरोध किया था : यूपी सरकार

मंगलवार को हुई सुनवाई के दौरान यूपी सरकार ने कहा था कि उसने मिश्रा की जमानत अर्जी का विरोध किया था। याचिकाकर्ता का यह आरोप पूरी तरह गलत है कि राज्य सरकार ने अर्जी का प्रभावी ढंग से विरोध नहीं किया। वहीं, यूपी पुलिस ने शीर्ष कोर्ट से कहा था कि राज्य सरकार ने लखीमपुर खीरी केस के गवाहों व पीड़ितों के परिजनों की सुरक्षा के सारे इंतजाम किए हैं। सभी गवाहों से उनकी सुरक्षा को लेकर नियमित संपर्क भी किया जा रहा है।

आशीष मिश्रा को दी गई जमानत के खिलाफ पीड़ित परिवारों की ओर से सुप्रीम कोर्ट में दायर याचिका में कहा गया है कि हाईकोर्ट ने उन्हें जमानत देते समय शीर्ष अदालत के दिशा-निर्देशों की अवहेलना की। आरोपी आशीष मिश्रा को इलाहाबाद हाई कोर्ट की लखनऊ बेंच ने बीते दिनों जमानत दी थी। जमानत मंजूर होने के बाद ही मृत किसानों के परिजनों ने जमानत का विरोध किया था और इस आदेश को चुनौती देने की बात कही थी।
एसयूवी से कुचले गए थे चार किसान

गत वर्ष 3 अक्तूबर को उत्तर प्रदेश के उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य की लखीमपुर खीरी जिले की यात्रा के खिलाफ प्रदर्शन कर रहे चार किसान एक एसयूवी द्वारा कुचले जाने के बाद मारे गए थे। यह एसयूवी कथित तौर पर केंद्रीय गृह राज्यमंत्री अजय कुमार मिश्रा के काफिले का हिस्सा थी। मामले में केंद्रीय मंत्री मिश्रा के बेटे आशीष मिश्रा का नाम आया था। इसके बाद पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर जेल भेज दिया था।

लखीमपुर खीरी जिले के तिकुनिया गांव में हुई उक्त हिंसा के मामले में एसआईटी ने तीन महीने के अंदर सीजेएम अदालत में तीन जनवरी को 5000 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की थी। इसमें आशीष मिश्र को मुख्य आरोपी बनाते हुए 13 लोगों को मुल्जिम बताया था। इन सभी के खिलाफ सोची समझी साजिश के तहत हत्या, हत्या का प्रयास, अंग भंग की धाराओं समेत आर्म्स एक्ट के तहत कार्रवाई की थी।

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