द इन्फो वॉर: यूक्रेन के सामने क्यों बेबस नजर आ रही रूसी सेना, कैसे पुतिन का सिरदर्द बने एलन मस्क, क्या है स्टारलिंक की भूमिका?

वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, कीव/मॉस्को
Published by: कीर्तिवर्धन मिश्र
Updated Sun, 27 Mar 2022 05:40 PM IST


सार

बड़ी बात यह है कि रूस के पास मस्क की तरफ से मुहैया कराए गए इंटरनेट को बंद करने का भी कोई तरीका नहीं है, क्योंकि स्टारलिंक सीधे सैटेलाइट के जरिए इंटरनेट मुहैया कराता है।

एलन मस्क ने यूक्रेन को स्टारलिंक भेजकर युद्ध का रुख ही बदल दिया।
– फोटो : अमर उजाला/सोनू कुमार

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विस्तार

रूस की ओर से यूक्रेन के खिलाफ जंग छेड़े हुए अब 32 दिन बीत चुके हैं। अब तक के युद्ध की बात करें तो रूस का करीब 64 किलोमीटर लंबा टैंकों का बेड़ा यूक्रेन की राजधानी कीव के बाहर ही फंसा है। बताया जाता है कि पिछले दो हफ्तों से रूसी सेना यूक्रेन के अहम शहरों में गतिरोध का सामना कर रही है। इसी के चलते रूस को अब यूक्रेन में कब्जा करने में खासी दिक्कतें आ रही हैं। इस बीच यूक्रेनी सेना ने भी शहरों में रूस के टैंकों और सैनिकों पर हमले तेज किए हैं। जानकारों की मानें तो रूस को रोकने में एक बड़ा किरदार निभा रहे हैं टेस्ला और स्पेसएक्स जैसी कंपनियों के मालिक एलन मस्क। स्पेस इंटरनेट की अपनी आधुनिक तकनीक को यूक्रेन तक पहुंचाकर मस्क ने रूसी राष्ट्रपति के सामने बड़ी चुनौती पेश की है। 

कैसे पुतिन के लिए सिरदर्द बन गए हैं एलन मस्क?

गौरतलब है कि यूक्रेन के विदेश मंत्री दिमित्रो कुलेबा ने हमला शुरू होने के बाद दावा किया था कि रूसी सेना उनके इंटरनेट नेटवर्क को निशाना बना रही है। इसका असर यह हुआ था कि एक समय आधे से ज्यादा यूक्रेन बिना इंटरनेट के लिए रहने को मजबूर था और उसकी सेना को बिना नेटवर्क के सूचनाओं के आदान-प्रदान में भी काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा था। ऐसे में कुलेबा ने सीधे मस्क को टैग कर ट्वीट किया था और उनसे स्टारलिंक सैटेलाइट के जरिए इंटरनेट मुहैया कराने की अपील की थी।

एलन मस्क ने भी यूक्रेन की तरफ से मदद की गुहार को नजरअंदाज नहीं किया और अगले कुछ ही हफ्तों में पूरे देश को इंटरनेट मुहैया कराने के लिए आधुनिक उपकरणों की सप्लाई शुरू कर दी। इसका असर यह हुआ कि रूस की लाख कोशिशों के बावजूद यूक्रेन में फिर इंटरनेट बहाल हो गया। बड़ी बात यह है कि रूस के पास मस्क की तरफ से मुहैया कराए गए इंटरनेट को बंद करने का भी कोई तरीका नहीं है, क्योंकि स्टारलिंक सीधे सैटेलाइट के जरिए इंटरनेट मुहैया कराता है।

रूस को रोकने में इंटरनेट का इस्तेमाल कैसे कर रही है यूक्रेनी सेना?

ब्रिटिश अखबार द टेलिग्राफ की रिपोर्ट की मानें तो इस वक्त यूक्रेनी सेना इसी सैटेलाइट इंटरनेट के जरिए रूसी सेना को रोकने में सफल हो रही है। अपने मजबूत नेटवर्क की वजह से स्टारलिंक का इंटरनेट यूक्रेनी सेना की एयरोरोज्विद्का (एरियल रिकॉनेसा यानी हवाई टोही) क्षमताओं को बढ़ा रहा है और इसी का फायदा उठाते हुए यूक्रेनी सेना रूस के ड्रोन्स और टैंकों को ट्रैक करने में सफल हो रही है।

यूक्रेन के ड्रोन्स भी स्टारलिंक के इंटरनेट की वजह से रूस के खिलाफ काफी कारगर साबित हो रहे हैं। उन्हें दूरदराज के इलाकों में भी जबरदस्त कनेक्टिविटी मिल रही है और सूचनाओं का आदान-प्रदान भी तेजी से संभव हो पा रहा है। इस तकनीक के साथ ही ड्रोन्स को सीधा टैंकों के बड़े-बड़े बेड़ों पर हमले करने में मदद मिल रही है। 

कैसे काम करता है स्टारलिंक नेटवर्क?

स्टारलिंक के पास फिलहाल पृथ्वी की कक्षा में 2100 से ज्यादा सैटेलाइट हैं। इसके अलावा मस्क ने कुल 12 हजार कम्युनिकेशन सैटेलाइट और भेजने की योजना रखी है। आम उपग्रहों के मुकाबले स्टारलिंक की सैटेलाइट्स पृथ्वी की कक्षा में काफी नीचे स्थित हैं, यह पृथ्वी की सतह से महज 550 किमी ही ऊपर हैं, जिसकी वजह से इनकी संचार क्षमता दूर स्थित सैटेलाइट्स से काफी ज्यादा है। इतना ही नहीं आम सैटेलाइट्स से उलट स्टारलिंक की एक सैटेलाइट की दूरी दूसरी सैटेलाइट से काफी कम रखी गई है। इससे दो सैटेलाइट्स के जरिए सिग्नल का आदान-प्रदान भी काफी आसान है और इसीलिए दुश्मनों के छिपने की भी कोई संभावना नहीं बचती। 

स्टारलिंक की यह सैटेलाइट्स अलग-अलग जगहों पर रेडियो क्षमता वाले ट्रकों को सिग्नल भेजती हैं, जो कि इन सिग्नल को आगे लोगों के मोबाइल-लैपटॉप कनेक्शन, ड्रोन और सैन्य बेसेज तक पहुंचाते हैं। मौजूदा समय में यूक्रेन में सबसे ज्यादा डाउनलोड होने वाली एप्लिकेशन स्टारलिंक ही है, जिसके जरिए आम लोग भी इंटरनेट सेवाओं का फायदा उठा पा रहे हैं।

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