डिजिटल सर्वे का खुलासा- 95 फीसदी वक्फ संपत्तियों का सेस नहीं जमा होता, अब होगी जांच

यूपी के कानपुर शहर की 95 फीसदी वक्फ संपत्तियों से तय नियम के अनुसार इनके बोर्डों को सेस नहीं मिल पाता है। डिजिटल सर्वे के अनुसार पांच हजार से अधिक वक्फ की संपत्तियां हैं लेकिन इनसे उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड और उत्तर प्रदेश शिया वक्फ बोर्ड को आमदनी नहीं हो पा रही है। अब मुतवल्लियों को नोटिसें भेजी जाएंगी। 

उत्तर प्रदेश सुन्नी सेंट्रल वक्फ बोर्ड और उत्तर प्रदेश शिया वक्फ बोर्डों के पास वक्फ संपत्तियों की देखभाल करने समेत वक्फ नियमों का पालन कराने की जिम्मेदारी है। सभी वक्फ संपत्तियों की मैपिंग की जा रही है। इससे पहले इनका डिजिटलीकरण कार्य पूरा किया जा रहा है। डिजिटल सर्वे पूरा होने से पहले जो संख्या सामने आई है, वास्तविक संख्या इससे अधिक मानी जा रही है।

शहर में 5336 वक्फ संपत्तियां

शहर में 5298 सुन्नी और 38 शिया वक्फ संपत्तियों का डिजिटलीकरण हो चुका है। इस तरह कुल सर्वे में 5336 वक्फ संपत्तियां सामने आ चुकी हैं। इन संपत्तियों के रखरखाव और देखभाल की जिम्मेदारी मुतवल्ली (प्रबंधक) की होती है। मुतवल्ली वक्फ बोर्ड के स्तर से नियुक्त किए जाते हैं। बड़ी संख्या में मुतवल्ली भी विवादित हैं। अब बोर्ड इनकी भी पड़ताल में जुटा है।

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सभी सेस दें तो मालामाल हो जाएं बोर्ड

सामान्य नियमों के अनुसार यदि सभी वक्फ संपत्तियों से कुल आय का 07.5 फीसदी सेस मिलने लगे तो दोनों वक्फ बोर्ड मालामाल हो जाएं। वक्फ बोर्डों का गठन भी इसी उद्देश्य से किया गया था। बोर्ड अपनी आमदनी का सही से हिसाब किताब भी नहीं रख पाता था।सत्र 2021-22 में सुन्नी वक्फ बोर्ड से 12 लाख और शिया वक्फ बोर्ड से 32 लाख आमदनी का दावा किया गया था। डिजिटलीकरण होने के बाद यह आमदनी बढ़ने का ट्रेंड सामने आया था। 

शहर काजी, मुफ्ती साकिब अदीब मिस्बाही ने कहा कि वक्फ में सबसे ज्यादा घपला है। प्रदेश सरकार के प्रयास से यह घपला अब सामने आ सकेगा। वक्फ की जांच किए जाने के फैसले का हम सभी ने इस्तकबाल किया है। जांच में हजारों की संख्या में खोई या दबी वक्फ संपत्तियां सामने आएंगी। इससे समुदाय को देर-सवेर बड़ा लाभ मिल सकता है। 

शहर में प्रमुख सुन्नी वक्फ संपत्तियां

दरगाह- 113

मकान- 2933

मस्जिदें- 364

दुकानें- 708

कुल- 5298

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