‘जे. सी. जोशी स्मृति शब्द साधक सम्मान’ 2020 निर्मला जैन को जबकि 2021 का विश्वनाथ त्रिपाठी को

नई दिल्ली. हिंदी साहित्यिक पत्रिका पाखी ने ‘जे. सी. जोशी स्मृति शब्द साधक’ सम्मानों की घोषणा शनिवार को कर दी. वर्ष 2021 का ‘जे. सी. जोशी स्मृति शब्द साधक शिखर सम्मान’ डॉक्टर विश्वनाथ त्रिपाठी को दिया जा रहा है, जबकि 2020 के लिए प्रोफेसर निर्मला जैन के नाम की घोषणा की गई है.

विश्वनाथ त्रिपाठी हिंदी के वरिष्ठ आलोचक और गद्यकार हैं. प्रगतिशील विचारधारा से संबद्ध डॉ. त्रिपाठी ने मध्यकालीन साहित्य से लेकर समकालीन साहित्य तक की आलोचना में गहरी अंतर्दृष्टि का परिचय दिया है. जीवनी और संस्मरण लेखन के क्षेत्र में भी उन्होंने महत्त्वपूर्ण मुकाम हासिल किया है. ‘हिंदी आलोचना’, ‘लोकवादी तुलसीदास’, ‘मीराँ का काव्य’, ‘देश के इस दौर में’, ‘कुछ कहानियाँ : कुछ विचार’, ‘पेड़ का हाथ’, ‘उपन्यास का अंत नहीं हुआ है’, ‘कहानी के साथ साथ’, ‘आलोचक का सामाजिक दायित्व’ आदि उनकी प्रमुख आलोचनात्मक कृतियाँ हैं. उन्होंने ‘व्योमकेश दरवेश’ शीर्षक से आचार्य हजारीप्रसाद द्विवेदी की जीवनी लिखी है.

वर्ष 2020 का ‘जे. सी. जोशी स्मृति शब्द साधक शिखर सम्मान’ प्रोफेसर निर्मला निर्मला जैन को दिया जा रहा है. निर्मला जैन ने अपनी वस्तुनिष्ठ आलोचना-दृष्टि और बेबाक अभिव्यक्ति से हिंदी आलोचना में उल्लेखनीय जगह बनाई है. हिंदी संसार को पाश्चात्य साहित्य सिद्धांत से परिचय कराने का श्रेय निर्मला जैन को जाता है. उन्होंने यूरोपीय विचारकों की कई पुस्तकों का अनुवाद हिंदी में किया है. उनकी चर्चित पुस्तकों की एक लंबी फेहरिस्त है. ‘आधुनिक हिंदी काव्य में रूप विधाएं’, ‘रस सिद्धांत और सौंदर्यशास्त्र’, ‘साहित्य साहित्यः मूल्य और मूल्यांकन’, ‘आधुनिक साहित्यः रूप और संरचना’, ‘समाजवादी साहित्य : विकास की समस्याएं’, ‘हिंदी आलोचना की बीसवीं सदी, ‘कथा समय में तीन हमसफर’, ‘पाश्चात्य साहित्य चिंतन और ‘जमाने में हम’, ‘दिल्ली शहर दर शहर’ उनकी प्रमुख पुस्तकें हैं.

वर्ष 2020 के ‘शब्द साधक आलोचना सम्मान’ के लिए वीरेंद्र यादव के नाम की घोषणा उनके समग्र आलोचनात्मक अवदान को देखते हुए किया गया है. 2021 के लिए यह सम्मान प्रोफेसर दुर्गा प्रसाद गुप्त को उनके समग्र आलोचनात्मक अवदान के लिए देने की घोषणा की गई है. प्रोफेसर गुप्त की अपनी गहरी अंतर्दृष्टि और आलोचनात्मक विवेक ने सभी का ध्यान आकर्षित किया है.

वर्ष 2020 का ‘शब्द साधक कविता सम्मान’ के लिए रश्मि भारद्वाज का चयन उनके कविता संग्रह ‘मैंने अपनी मां को जन्म दिया है’ के लिए किया गया. नई पीढ़ी की सुपरिचित कवयित्री और अनुवादक हैं, जबकि 2021 का यह सम्मान झारखंड की दुमका की रहनेवाली कवयित्री जसिंता करकेट्टा को दिया जा रहा है. जसिंता करकेट्टा आदिवासी संवेदना और सरोकारों की नई पीढ़ी की कवयित्री हैं.

वर्ष 2020 का ‘शब्द साधक हिंदीतर सम्मान’ ममांग दई को दिया जा रहा है. ममांग दई एक भारतीय आदिवासी कवयित्री, उपन्यासकार और पत्रकार हैं. 2021 के लिए यह सम्मान कावेरी राय चौधरी को दिया जा रहा है. वह बंगला की चर्चित कथाकार हैं.

वर्ष 2020 का ‘शब्द साधक अनुवाद सम्मान’ विभा रानी को दिया जा रहा है. उन्होंने प्रख्यात मैथिली रचनाकार लिली रे की कविता संग्रह का अनुवाद किया है. 2021 के लिए यह सम्मान’ युवा अनुवादक कंचन वर्मा को देने की घोषणा की गई है. उन्होंने अंग्रेजी से हिंदी में दर्जन भर पुस्तकें अनूदित की हैं.

वर्ष 2020 का ‘शब्द साधक जीवन मानक सम्मान’ संजना तिवारी को दिया जा रहा है. संजना तिवारी लगभग 25 वर्षों से हिंदी की किताबें बेचकर अपना परिवार चला रही हैं. पिछले कुछ वर्षों से दिल्ली के मंडी हाउस स्थित श्रीराम सेंटर के सामने एक वृक्ष के नीचे वे हिंदी पुस्तकों की अपनी दुकान लगाती हैं. 2021 का ‘शब्द साधक जीवन मानक सम्मान’ नवनीत त्यागी को दिया जा रहा है. नवनीत त्यागी लगभग 35 वर्षों से विभिन्न प्रकाशनों के लिए प्रूफ रीडिंग का कार्य कर रहे हैं. उनके जीवन संघर्ष और हिंदी के प्रति उनके अनुपम सेवा भाव को ध्यान में रखते यह सम्मान दिया जा रहा है.

वर्ष 2020 का ‘शब्द साधक जनप्रिय लेखक सम्मान’ उमा शंकर चौधरी को उनके कहानी संग्रह ‘दिल्ली में नींद’ के लिए दिया जा रहा है. 2021 के सम्मान के लिए योगेन्द्र आहूजा के नाम की घोषणा की गई है. योगेंद्र आहूजा का कहानी संग्रह ‘लफ्फाज तथा अन्य कहानियां’ खूब चर्चित रही थी.

Tags: Books, Hindi Literature

Source link

Leave a Reply

Your email address will not be published.