जवानी में अनिद्रा की समस्या बुढ़ापे में दे सकती है परेशानी, समय रहते हो जाएं सतर्क

आजकल के लाइफस्टाइल में अनिद्रा (Insomnia) यानी नींद ना आना कई लोगों के लिए आम समस्या हो सकती है, लेकिन जानकर इसे लेकर लापरवाही ना करने की सलाह हमेशा से देते रहे हैं. एक स्वस्थ शरीर के लिए अच्छी और पूरी नींद का महत्व किसी से छिपा नहीं है. यही वजह है कि अनिद्रा यानी नींद नहीं आने को एक बीमारी माना जाता है. अनिद्रा से सेहत को होने वाले नुकसान के बारे में कई स्टडीज में बताया जा चुका है, लेकिन अब फिनलैंड की हेलसिंकी यूनिवर्सिटी के रिसर्चर्स द्वारा की गई ताजा स्टडी में, लंबे समय तक अनिद्रा के लक्षण बने रहने से मानसिक समस्याओं से जुड़े गंभीर खतरे की बात सामने आई है.

जर्नल ऑफ एजिंग एंड हेल्थ (Journal of Aging and Health) में प्रकाशित इस स्टडी के निष्कर्ष इस ओर भी ध्यान दिलाते हैं कि यदि यंग एज या मैच्योर एज (प्रौढ़ आयु) से अनिद्रा के लक्षण दिख रहे हैं, तो इसकी अनदेखी रिटायरमेंट के बाद भी लाइफ पर बहुत साइड इफेक्ट डाल सकती है.

जितनी लंबी परेशानी, उतनी बड़ी बीमारी
यूनिवर्सिटी ऑफ हेलसिंकी के रिसर्चर एंट्टी इथोलेन (Antti Etholén) के अनुसार, ‘अनिद्रा या नींद ना आने की प्रॉब्लम जितने लंबे समय तक बनी रहती है, ब्रेन पर उसके उतने ज्यादा साइड एफेक्ट्स होते हैं. ऐसे में इंसान के सीखने-समझने की शक्ति (कॉग्नेटिव पावर) कमजोर होने लगती है. वैसे तो कुछ स्टडी में ये सामने आ चुका है कि किस तरह से अनिद्रा ब्रेन के काम करने की क्षमता पर असर डालती है, लेकिन इस स्टडी में खास बात ये है कि इसमें 15 से 17 साल तक फॉलोअप के आधार पर नींद ना आने और दिमागी समस्याओं के बीच स्पष्ट संबंध देखा गया.’

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क्या कहते हैं जानकार
इस स्टडी में पाया गया कि अगर अनिद्रा के लक्षणों में सुधार किया जाए, तो ब्रेन को होने वाले नुकसान को भी कम किया जा सकता है. यूनिवर्सिटी ऑफ हेलसिंकी में डिपार्टमेंट ऑफ पब्लिक हेल्थ की प्रोफेसर, डॉ. टी लालुक्का (Dr.Tea Lallukka) ने कहा कि नतीजों को देखते हुए ये स्पष्ट है कि जितनी जल्दी अनिद्रा के लक्षणों को पहचान कर उसका सही इलाज ले लिया जाए, उतना ही बुढ़ापे में होने वाली मुश्किल से बचा जा सकता है.

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उन्होंने आगे कहा, ताजा स्टडी में केवल सेल्फ रिपोर्ट किए गए मेमोरी लक्षणों को ध्यान में रखा जा सकता है, जबकि आगे की स्टडीज में इस पर और रिसर्च करना दिलचस्प होगा कि क्या अनिद्रा का इलाज मैमोरी से जुड़ी बीमारियों के बढ़ने की गति को भी धीमा कर सकता है?”

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