चंपत राय ने कहा- हजारों साल तक अयोध्या राम मंदिर में नहीं होगी किसी तरह की मरम्मत की जरूरत

अयोध्या में बन रहा श्री राम मंदिर निर्माण इतनी बड़ी संरचना होगी कि शायद ही किसी ने कभी बनते देखा हो, यह संरचना अपने आप में अद्भुत रचना है। यह निर्माण इंजीनियरों के सामूहिक मस्तिष्क का एक चिंतन है। छह महीने तो इंजीनियरों को इसकी नींव का प्रारुप बनाने में निकल गए। दीवार व अन्य हिस्सों की संरचना, जमीन की मिट्टी हटाकर नीचे पत्थरों को जोड़ने के लिये लोहे के स्थान पर तांबे का प्रयोग हो रहा है। पत्थरों की विशाल चट्टान के रूप में बनकर यह निर्माण ऐसा होगा कि पचास, सौ या दो सौ वर्ष तो दूर हजारों साल तक इसमें मरम्मत की जरूरत नहीं पड़ेगी। 

श्रीरामजन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने ये बात पं. दीनदयाल उपाध्याय स्मृति महोत्सव पर विचार गोष्ठी में कहीं।उन्होंने कहा कि श्रीराम मंदिर हिंदुस्तान के गौरव की प्राण प्रतिष्ठा है, यह राष्ट्र का मंदिर है एक या दो व्यक्तियों का स्थान नहीं है। यह करोड़ों की भावना हैऔर उनकी अभिव्यक्ति इससे जुड़ी हुई है। 15 हजार संत, अशोक सिंघल, गुरु महंत अवैद्यनाथ जैसी तमाम विभूतियां गुलामी की निशानी को मिटाने में जुटी थीं। जिस तरह एक विदेशी हमलावर ने इसे तोड़कर नई बिल्डिंग बनाई थी, उसी तरह अयोध्या के नौजवानों ने भी अपना कब्जा कर लिया। 70 साल तक अदालतों में केवल यही चर्चा चलती रही कि यह सही है कि यह सही है। 2019 में सर्वोच्च न्यायालय के आठ न्यायाधीशों की एक पीठ ने 40 दिन की बौद्धिक कसरत के बाद निर्णय दिया। उन्होंने कहा कि जब से देश में जागरण का काम हो रहा है तो हिंदुस्तान की दुनिया में प्रतिष्ठा बढ़ रही है। प्रधानमंत्री केवल हमारे राष्ट्र के सम्मान की रक्षा के लिए सत्ता में बैठे हुए हैं।

पं. दीनदयाल उपाध्याय की चर्चा करते हुए चंपत राय ने कहा कि वह शुरुआत में यहां दो-तीन बार आए थे। आज यहां चल रहे विभिन्न प्रकल्पों को देखकर मन प्रसन्न हुआ। कहा कि 1925 में हिंदुओं को जगाने के लिए संघ बना, दीनदयाल भी इसी माला के मनका थे। इस दौरान दीनदयाल धाम निवासी लखनऊ के एडीजी ब्रज भूषण शर्मा ने शिक्षा और पर्यावरण क्षेत्र में किए जा रहे कामों का उल्लेख करते हुए कहा वह शिक्षा के उन्नयन में जुटे हैं। गोष्ठी की अध्यक्षता महेंद्र भूषण महाराज ने की। कार्यक्रम के अंत मे प्रतिभाशाली विद्यार्थियों को भी सम्मानित किया।

 

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