खोरी गांव मामले में फ्लैट मिलने तक पात्र लोगों को हर माह ₹2000 दे फरीदाबाद नगर निगम: SC

खोरी गांव केस पर सु्प्रीम कोर्ट में अगली सुनवाई 26 अप्रैल को होगी

नई दिल्‍ली :

खोरी गांव मामले में सुप्रीम कोर्ट ने फ्लैट मिलने तक पात्र लोगों को हर महीने दो हजार देने का निर्देश दिया है. SC ने  खोरी गांव  मामले में निर्देश दिया है कि जब तक विस्थापितों में से पात्र व्यक्तियों को स्थायी आवास की पेशकश नहीं की जाती है तब तक फरीदाबाद नगर निगम 2000 रुपए प्रति माह की अनुग्रह राशि का भुगतान करेगा. निगम को यह राशि तब तक देनी होगी जब तक निगम द्वारा पात्र लोगों को कब्जा पत्र जारी नहीं कर दिया जाता. जस्टिस एएम खानविलकर, जस्टिस एएस ओक और जस्टिस सीटी रविकुमार की बेंच ने यह आदेश पारित किया.सुप्रीम कोर्ट की बेंच ने पाया कि इस मामले में प्रभावित लोगों को बाहर रहने के लिए मजबूर होना पड़ रहा है क्योंकि आवंटित परिसर में पानी और जल निकासी की सुविधा नहीं है. अदालत ने कहा कि फरीदाबाद नगर निगम ने प्रस्तुत किया है कि करीब 1027 पात्र व्यक्तियों को अप्रैल 2022 के अंत तक रहने योग्य स्थिति में स्थायी आधार पर परिसर आवंटित किया जाएगा. बेंच ने निर्देश दिया कि परिसर रहने योग्य स्थिति में है, यह फरीदाबाद नगर निगम आयुक्त  द्वारा प्रमाणित किया जाएगा. 

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बेंच ने कहा कि जब आयुक्त यह प्रमाणित कर दें कि संबंधित आवंटियों को आवंटित परिसर रहने योग्य स्थिति में है और तुरंत कब्जा कर लिया जा सकता है तभी कब्जा पत्र तभी जारी किया जा सकता है. निगम को 21 अप्रैल से पहले आवंटन का काम पूरा करना होगा.  यह भी हमारे संज्ञान में लाया गया था कि जिस भूखंड पर अनधिकृत संरचनाओं को हटाया गया था, उसका स्थानीय लोगों द्वारा दुरुपयोग किया जा रहा है. हम फरीदाबाद के पुलिस अधीक्षक को निर्देश देते हैं कि वह निगम को सहायता प्रदान करेंगे जिससे कि यह सुनिश्चित किया जा सके कि उस जगह पर कोई अतिक्रमण न हो या भविष्य में विचाराधीन क्षेत्र या भूखंड पर अनधिकृत संरचना न हो.  

इसके अलावा बेंच ने यह भी कहा है कि चूंकि निगम पहले से ही पूरे क्षेत्र के पुनर्विकास की योजना पर काम कर रहा है, वन विभाग के सचिव क्षेत्र में वृक्षारोपण के लिए उचित निर्देश जारी कर सकते है. मामले में अगली सुनवाई 26 अप्रैल को होगी. गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने गत वर्ष सात जून को फरीदाबाद नगर निगम को खोरी गांव के वन क्षेत्र में स्थित करीब 10 हजार घरों को छह हफ्ते के भीतर ढहाने का आदेश दिया था. कोर्ट ने साफ किया था कि हर हालत में वन क्षेत्र खाली होना चाहिए और इसमें किसी प्रकार का समझौता नहीं किया जा सकता.

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