क्या है पोस्टपार्टम मसाज? डिलीवरी के बाद मालिश कराने के फायदे, ध्यान रखने वाली बातें

बच्चे को जन्म देने से पहले और जन्म देने के बाद महिलाओं के शरीर में कई तरह के बदलाव आते हैं. पूरे नौ महीने एक गर्भवती महिला कई तरह की शारीरिक और मानसिक समस्याओं, चिंता, घबराहट से गुजरती है, लेकिन ये सिलसिला पोस्ट डिलीवरी भी जारी रहता है. अधिकतर महिलाएं पोस्ट डिलीवरी भी काफी कमजोरी महसूस करती हैं. मोटापा, पोस्टपार्टम डिप्रेशन से परेशान रहती हैं. शरीर में एनर्जी की कमी महसूस होती है. ऐसे में खुद को रिलैक्स करने के लिए आप पोस्टपार्टम मसाज करवा कर देखें. इससे काफी हद तक आपकी थकान, लो एनर्जी, स्ट्रेस आदि दूर हो सकती है. आप मेंटली भी रिलैक्स महसूस करेंगी. जानें, पोस्ट डिलीवरी बॉडी मसाज कराने से क्या फायदे (Benefits of Massage after Delivery) हो सकते हैं.

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क्या है पोस्टपार्टम मसाज
एक बच्चे को जन्म देने के बाद जब एक महिला कुछ सप्ताह पूरे शरीर का मसाज करवाती है, उसे पोस्टपार्टम मसाज कहा जाता है. इससे नई बनी मांओं को शारीरिक और मानसिक रूप से रिलैक्स महसूस हो सकता है. शरीर में होने वाले दर्द जैसे कमर, पैर, पेट या फिर सिरदर्द, स्तनपान करान से ब्रेस्ट में दर्द जैसी समस्याएं ठीक होती हैं. मांसपेशियां रिलैक्स होती हैं. पोस्ट डिलीवरी किसी भी तरह की शारीरिक समस्या को दूर करने में बेहद कारगर साबित होता है मसाज.

डिलीवरी के बाद कब शुरू करें मसाज
बच्चे को जन्म देने के बाद से आपको जब भी खुद में अच्छा महसूस होने लगे, तब से आप बॉडी की मालिश करा सकती हैं. चाहे, सिजेरियन डिलीवरी हुई हो या नॉर्मल डिलीवरी, इसे पूरी तरह से रिकवर होने में लगभग 6 से 8 सप्ताह लग जाते हैं. ऐसे में जब तक आप पूरी तरह से स्वस्थ ना हो जाएं, मसाज शुरू ना करें, खासकर सिजेरियन डिलीवरी में मसाज कराने में जल्दबाजी ना दिखाएं.

पोस्टपार्टम मसाज के फायदे

  • मॉमजंक्शन में छपी एक खबर के अनुसार, दर्द से राहत पाने के लिए आप पोस्टपार्टम बॉडी मसाज करवा सकती हैं. गर्भावस्था के कारण शरीर में दर्द, विशेष रूप से पीठ के निचले हिस्से, कूल्हों और पेट में दर्द होना सामान्य है. मालिश कराने से मांसपेशियों को आराम मिलता है. दर्द कम होता है.
  • यदि आपको शरीर के किसी भी हिस्से में सूजन की समस्या है, तो मालिश कराने से दूर हो सकता है. गर्भावस्था के दौरान रक्त की मात्रा लगभग 50% बढ़ जाती है और गर्भावस्था के बाद शरीर के तरल पदार्थ को संतुलित करना होता है. ऐसे में डिलीवरी के बाद मालिश शरीर से तरल और विषाक्त पदार्थों को खत्म करने के लिए सर्कुलेशन और लिम्फैटिक ड्रेनेज को प्रोत्साहित करने में मदद करती है.

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  • यदि आपको बच्चे की देखभाल में रात में बार-बार जागना पड़ता है, तो आप मालिश जरूर कराएं, इससे बेहतर नींद आने में मदद मिल सकती है. मसाज थेरेपी थकान को कम करती है, आराम देती है और आपको बेहतर नींद देती है. दिन में जब आपके बच्चे की मालिश हो जाए, तो आप भी अपनी मालिश कराएं. मालिश कराने के बाद बच्चे तुरंत सो जाते हैं, उसी समय आप भी थोड़ी देर सो जाएं.
  • आमतौर पर कुछ महिलाओं को पोस्टपार्टम डिप्रेशन, एंग्जायटी का सामना करना पड़ता है, जो हार्मोनल परिवर्तन के कारण होता है. मालिश कराने से अवसाद और एंग्जायटी को दूर करने में काफी हद तक मदद कर सकती है. यह मूड में भी सुधार करती है.

प्रसवोत्तर मालिश कब न कराएं
– सिजेरियन सेक्शन में जब तक टांका पूरी तरह से ठीक ना हो जाए.
– त्वचा संबंधित समस्याएं जैसे फफोले, फोड़े, एक्जिमा और चकत्ते होने पर ना कराएं मसाज.
– हर्निया और उच्च रक्तचाप में मालिश कराने से बचें.

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