कैविटी को बढ़ने से रोकने के लिए अपनाएं ये घरेलू उपाय

हाइलाइट्स

कैविटी को कम करने के लिए फ्लोराइड टूथपेस्‍ट का करें इस्‍तेमाल.
कैविटी को कम करने के लिए ऑयल पुलिंग का प्रयोग करें.
कैविटी को रोकने के लिए मुंह की सफाई जरूरी है.

Home Remedies To Stop The Cavity – ठीक ढंग से ब्रश न करना, माउथ इंफेक्‍शन और अधिक मीठा का सेवन कैविटी के लिए जिम्‍मेदार हो सकते हैं. कैविटी दांतों की एक सामान्‍य समस्‍या है जो किसी भी उम्र में हो सकती है. कैविटी से मुंह में कई तरह की समस्‍याएं हो सकती है जैसे- मसूढ़ों में सूजन, दांत में दर्द व दांत में खोखलापन आदि. कैविटी में होने वाले दर्द असहनीय होता है जिस वजह से सिरदर्द और कान में दर्द भी हो सकता है. कैविटी के बढ़ जाने पर कई मामलों में दांतों को निकलना पड़ जाता है या रूट कैनाल ट्रीटमेंट का सहारा लेना पड़ता है. शुरुआती कैविटी को नेचुरली क्‍योर करने के लिए घरेलू उपचार भी फायदेमंद हो सकते हैं. ये काफी इफेक्‍टिव होते हैं जिनके प्रयोग से दर्द में भी राहत मिल सकती है. चलिए जानते हैं घरेलू उपचारों के बारे में.

शुगर फ्री गम
खाने के बाद शुगर फ्री गम चबाने से कैविटी को बढ़ने से रोका जा सकता है. हेल्‍थ लाइन के मुताबिक  च्युइंगम चबाने से मुंह में रिमिनिरेलाइज इनेमल फॉर्म होता है जो लार के फ्लो में बढ़ोतरी कर सकता है. शुगर फ्री गम में कैल्शियम फॉस्‍फेट कंपाउंड होता है जो दांतों के लिए फायदेमंद हो सकता है.

विटामिन डी
खाने को अब्‍जॉर्ब करने के लिए विटामिन-डी महत्‍वपूर्ण होता है. दही और दूध में भरपूर मात्रा में कैल्शियम और विटामिन डी होता है जो दांतों की हेल्‍थ के लिए वरदान माने जाते हैं. विटामिन डी का सेवन करने से दांतों से संबंधित समस्‍याओं को कम किया जा सकता है. ये कैविटी को कम करने में भी मदद कर सकता है.

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फ्लोराइड टूथपेस्‍ट का प्रयोग
कैविटी को रोकने और इनेमल को फिर से बनाने में फ्लोराइड एक महत्‍वूर्ण भूमिका निभाता है. नियमित रूप से फ्लोराइड टूथपेस्‍ट से दांतों को ब्रश करने से कैविटी को बढ़ने से रोका जा सकता है. जब भी टूथपेस्‍ट का चुनाव करें उसमें फ्लोराइड की कितनी मात्रा है जरूर देखें.

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ऑयल पुलिंग
ऑइल पुलिंग एक प्राचीन प्रक्रिया है जिसमें तिल के या नारियल तेल को लगभग 20‍ मिनट तक मुंह में घुमाना होता है. 20 मिनट बाद इसे बाहर निकाल दें. ऐसा करने से शरीर के विषैले पदा‍र्थ बाहर निकल जाते हैं. नारियल तेल की अपेक्षा तिल के तेल का प्रयोग करने से प्‍लाक, मसूड़े की सूजन और मुंह में मौजूद बैक्‍टीरिया की संख्‍या प्रभावी रूप से कम हो जाती है.

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